मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने जर्मन साप्ताहिक देय श्पीगल को दिए गए इंटरव्यू में, जो शनिवार को प्रकाशित हुआ, परमाणु समझौते में मतभेद के मैकेनिज़्म को सक्रिय करने के संबंध में जर्मनी, ब्रिटेन और फ़्रान्स के संभावित क़दम की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि यूरोप वालों के पास इस प्रकार के तंत्र को इस्तेमाल करने के लिए क़ानूनी तर्क नहीं हैं। उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए कि इस मामले में रूस और चीन के विचार ईरान जैसे ही हैं, कहा कि यूरोप वालों को एक बड़ी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए।
ईरान के विदेश मंत्री ने एनपीटी से ईरान के निकलने की धमके के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि एनपीटी से ईरान के निकलने का मतलब यह नहीं है कि वह एटम बम बनाएगा क्योंकि नैतिक व धार्मिक आधारों पर वह परमाणु बम बनाने का इरादा ही नहीं रखता। विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने अमरीका द्वारा आईआरजीसी की क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अमरीका, यूरोप और संपूर्ण विश्व समुदाय, आतंकी गुट दाइश के ख़ात्मे के लिए जनरल सुलैमानी के ऋणी हैं। उन्होंने कहा कि जनरल सुलैमानी की शहादत की वजह से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है और अमरीका को पश्चिमी एशिया के क्षेत्र के लोगों की तरफ़ से इस आतंकी हमले का जवाब ज़रूर मिलेगा।